रविवार, 24 जनवरी 2010


” मैं तुफान हूँ, इसलिये
मुश्किलों से अंजान हूँ
मैं हिम्मत हूँ, सोच हूँ, बुलंद हूँ, बेजोड हूँ
मैं
हारकर भी जीतने के ज्जबों से भरपूर हूँ
मैं कोशिश हूँ, निरंतर हूँ, इसलिये
कामयाब हूँ।।”
जिस दिन से चला हूँ, मेरी मंज़िल पे नज़र है,
आँखों ने कभी
मील का पत्थर नहीं देखा… !!..
ये फूल मुझे कोई विरासत में नहीं मिले
हैं,
तुमने मेरा काँटों भरा बिस्तर नहीं देखा… !!..
बेवक्त अगर जाऊँगा सब
चोंक पड़ेंगे,
एक उम्र हुई दिन में कभी घर नहीं देखा… !!..
पत्थर कहता है
मेरा चाहने वाला,
शायद उसने मुझे कभी छूकर नहीं देखा…
क्या हार मैं क्या जीत मैं, किंचित नहीं भयभीत मैं! कर्त्तव्य पथ पर जो भी मिले, यह भी सही वह भी सही ! 

शनिवार, 12 दिसंबर 2009

दुनिया का पहला ब्लॉग किसने बनाया, इस बारे में मतैक्य नहीं है। लेकिन इस बारे में कोई विवाद नहीं है कि ब्लॉगिंग की शुरूआत १९९७ में हुई । अप्रैल १९९७ में न्यूयॉर्क के डेव वाइनर ने स्क्रिप्टिंग न्यूज नामक एक वेबसाइट शुरू की जिसने ब्लॉगिंग की अवधारणा को स्पष्ट किया और लोगों को अपने विचार इंटरनेट पर प्रकाशित करने के लिए प्रेरित किया। दिसंबर १९९७ में जोर्न बार्गर ने रोबोटविसडम.कॉम की शुरूआत की और पहली बार इसे 'वेब लॉग' का नाम दिया। पीटरमी.कॉम के पीटर मरहोल्ज ने वेबलॉग के स्थान पर उसके छोटे रूप 'ब्लॉग' का प्रयोग किया। तब से इंटरनेट पर ब्लॉगों की जो तेज हवा बही, उसने पहले आंधी और अब तूफान का रूप ले लिया है।



पहली हिन्दी चिट्ठा प्रविष्टि अक्तूबर 2002 में विनय (v9y) ने यहाँ लिखी -
http://hindi.blogspot.com/2002/10/blog-post.html

और पहला हिन्दी चिट्ठा आलोक ने नौ दो ग्यारह के नाम से 21 अप्रैल 2003 को बनाया -
http://9211.blogspot.com/2003_04_01_archive.html



रविवार, 22 नवंबर 2009

अपने जीवन के प्रकल्प को पूरा करने की चाहत सभी मे जगाना और इस चाहत को पूरा करने मे किंचितमात्र सहायता इस ब्लोग का उद्देश्य है