रविवार, 24 जनवरी 2010


” मैं तुफान हूँ, इसलिये
मुश्किलों से अंजान हूँ
मैं हिम्मत हूँ, सोच हूँ, बुलंद हूँ, बेजोड हूँ
मैं
हारकर भी जीतने के ज्जबों से भरपूर हूँ
मैं कोशिश हूँ, निरंतर हूँ, इसलिये
कामयाब हूँ।।”
जिस दिन से चला हूँ, मेरी मंज़िल पे नज़र है,
आँखों ने कभी
मील का पत्थर नहीं देखा… !!..
ये फूल मुझे कोई विरासत में नहीं मिले
हैं,
तुमने मेरा काँटों भरा बिस्तर नहीं देखा… !!..
बेवक्त अगर जाऊँगा सब
चोंक पड़ेंगे,
एक उम्र हुई दिन में कभी घर नहीं देखा… !!..
पत्थर कहता है
मेरा चाहने वाला,
शायद उसने मुझे कभी छूकर नहीं देखा…
क्या हार मैं क्या जीत मैं, किंचित नहीं भयभीत मैं! कर्त्तव्य पथ पर जो भी मिले, यह भी सही वह भी सही !